Amit Srivastava
Hind News Times 

बॉलीवुड को अक्सर परिवारवाद को अनुचित शह देने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है। परंतु सैफ अली खान उन चुनिन्दा अभिनेताओं में से एक है, जो अपनी फ़ैमिली कनैक्शन के दम पर कम, और अपने अभिनय के दम पर ही प्रसिद्ध हुए। शुरुआत में कुछ असफल फिल्मों के बाद उन्हें 1995 में इम्तिहान फिल्म से पहली बार बॉक्स ऑफिस सफलता मिली, और उसके बाद उन्होने पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिल चाहता है, रहना है तेरे दिल में, एक हसीना थी जैसी फिल्मों से उन्होंने यह सिद्ध किया है कि वे एक कुशल एंटेर्टेनर के साथ-साथ एक प्रतिभावान अभिनेता भी हैं।
विडम्बना तो यह रही की उन्हें अधिकतर पुरस्कार ऐसी भूमिकाओं के लिए मिले, जो उनकी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं करते थे। उन्होंने कई बेहतरीन परफॉर्मेंस दिये, चाहे वो कच्चे धागे में धनंजय पंडित का रोल हो, या फिर परिणीता में शेखर राय की भूमिका हो। ऐसे में ये बात किसी मज़ाक से कम नहीं होगी की उन्हे ‘हम तुम’ की उस भूमिका के लिए नेशनल अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर मिला, जो उनकी प्रतिभा का मानो उपहास उड़ा रही थी।परंतु विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित ‘ओमकारा’ में सैफ ने ईश्वर उर्फ लंगड़ा त्यागी के नकारात्मक किरदार को जो पहचान दी, उससे बॉलीवुड के साथ-साथ देशभर के सिनेमा फ़ैन उनके दीवाने हो गए। विलियम शेक्सपियर के नाटक ‘ओथेलो’ पर आधारित इस फिल्म में मुख्य भूमिका में भले अजय देवगन रहे हों, पर सैफ के अभिनय ने उनसे ज़्यादा तालियां और सीटियां बटोरीं। फिल्म में बेहतरीन अदाकारी के लिए सैफ अली खान को फिल्मफेयर में बेस्ट विलेन के पुरस्कार से नवाजा गया था।परंतु विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित ‘ओमकारा’ में सैफ ने ईश्वर उर्फ लंगड़ा त्यागी के नकारात्मक किरदार को जो पहचान दी, उससे बॉलीवुड के साथ-साथ देशभर के सिनेमा फ़ैन उनके दीवाने हो गए। विलियम शेक्सपियर के नाटक ‘ओथेलो’ पर आधारित इस फिल्म में मुख्य भूमिका में भले अजय देवगन रहे हों, पर सैफ के अभिनय ने उनसे ज़्यादा तालियां और सीटियां बटोरीं। फिल्म में बेहतरीन अदाकारी के लिए सैफ अली खान को फिल्मफेयर में बेस्ट विलेन के पुरस्कार से नवाजा गया था।
यहां पर एक और बात स्पष्ट होती है, जब भी सैफ अली खान के अंदर के प्रतिभावान अभिनेता को एक नई पहचान देनी हो, तो आप उन्हें अजय देवगन के साथ फिल्म में कास्ट कर दो। कच्चे धागे में पहली बार लोग सैफ अली खान के प्रतिभाशाली अभिनय से परिचित हुए, तो ओमकारा में उनके अभिनय का पूरा देश कायल हुआ। अब ‘तान्हाजी’ में एक बार फिर मुग़ल अफसर उदयभान राठौड़ के रूप में सैफ अली खान ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
परंतु यहां तक पहुंचने के लिए भी सैफ अली खान को कई असफलताओं का मुंह देखना पड़ा था। गो गोवा गॉन को छोड़ दें तो 2013 के बाद से उनकी एक भी फिल्म सफल नहीं हुई थी। जहां ‘हैप्पी एंडिंग’, ‘रंगून’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी, तो वहीं ‘फैंटम’, ‘शेफ’, ‘कालाकांडी’, ‘बाज़ार’ और ‘लाल कप्तान’ जैसी फिल्मों में सैफ अली खान की बेहतरीन अदाकारी भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक नहीं खींच पायी। हालत तो यह हो गयी कि सैफ को अपना अस्तित्व बचाने के लिए वेब सीरीज़ की ओर मुड़ना पड़ा था, जहां उन्हे ‘सेक्रेड गेम्स’ से थोड़ी सफलता मिल पायी।
परंतु ‘तान्हाजी’ की बॉक्स ऑफिस पर सफलता को देखते हुए हमें ये बताने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता है, अपितु सैफ अली खान के प्रतिभा के साथ न्याय करते हुए उनके डावांडोल करियर को एक नई उम्मीद दी है। हम आशा करते हैं कि आने वाले समय में सैफ को और भी बेहतरीन प्रोजेक्ट मिले, जो सभी का मनोरंजन करते हुए बॉक्स ऑफिस पर भी सफलता प्राप्त करे।
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