बस्ती का हामिद नेपाल से चला रहा टेरर फंडिंग गिरोह
बस्ती का हामिद नेपाल से टेरर फंडिंग गिरोह चला रहा है। उसके भारत में 10 हजार से ज्यादा एजेंट हैं। ये एजेंट उसके अवैध सॉफ्टवेयर ‘एएनएम के जरिए रेलवे के तत्काल कोटे में सेंधमारी कर मिनटों में सैकड़ों टिकट बनाने का अवैध धंधा कर रकम उगाहते हैं। देश में अवैध ई-टिकट के कारोबार के 85 फीसदी मार्केट पर उसका होल्ड है। काठमांडू से दुबई तक उसके तार जुड़े हैं और उसका दुबई नियमित आना-जाना है।
डीजी आरपीएफ अरुण कुमार ने ई-टिकट के अंतरराष्ट्रीय गिरोह के टेरर फंडिंग से जुड़ने का खुलासा किया था। भुवनेश्वर से पकड़े गए गुलाम मुस्तफा के पास से बरामद लैपटॉप, मोबाइल व अन्य दस्तावेज के मुताबिक ई-टिकट से जुटाई गई रकम को दुबई टेरर फंडिंग के लिए भेजा जाता है। डीजी ने बताया कि इस पूरे गिरोह का सरगना हामिद है। जो मौजूदा समय दुबई में बैठा है।
वहीं सूत्रों के मुताबिक बस्ती जिले के कप्तानगंज थानांतर्गत रमवापुर गांव का रहने वाला इंटर पास हामिद पुत्र जमीरुउल हक पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में ई-टिकट बनाने का काम करता था। कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के फेर में हामिद ने खुद का सॉफ्टवेयर बना डाला। सबसे पहले उसने ब्लैक टीएस, नियो और फिर रेड मिर्ची सॉफ्टवेयर बनाया।
अवैध सॉफ्टवेयर बेचकर एजेंटों के जरिए पूरे देश में उसने जाल फैलाना शुरू किया। आईआरसीटीसी की बजाय अन्य वेबसाइट से मिनटों में तत्काल कोटे के टिकट बनने की भनक लगते ही रेलवे के साथ ही अन्य खुफिया एजेंसिया सक्रिय हुईं। जांच में सॉफ्टवेयर का ‘मदर सर्वर और सरगना का अड्डा बस्ती में होना पाया गया।
28 अप्रैल 2016 को पहली दफा हामिद को उसी के सुपर सेलर शमशेर की मुखबिरी पर सीबीआई बेंगलुरु और विजिलेंस मुम्बई की संयुक्त टीम ने पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में
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