1980 के दशक का भारत के सबसे लोकप्रिय धारावाहिक रामायण को कौन देखना पसन्द नही करता है। उस जमाने मे ज्यादातर लोगों के घर टीवी नही हुआ करती थी जिसके वजह से लोग पड़ोसियों के घर जाकर रामायण का एपीसोड देखते थे। उस जमाने मे लाइट भी ज्यादातर अच्छे से नही रहती थी। खासतौर से एपिसोड चालू होते ही कभी कभी लाइटें कट जाया करती थी जिसके लिए लोगों ने बैटरी का यूज़ करके एपिसोड को पूरा करते थे।
क्या आप जानते हैं इस रामायण को बनने में कितना समय लगा और इसके एक एपिसोड से शो को कितना फायदा होता था। आइए जानते हैं।
इस शो के डायरेक्टर रामानंद जब इस शो को बनाने की बातें की तो इनका कोई साथ नही दिया सभी यही कहते थे कि इसमें कोई दम नही है लोग टीवी और इसे देखना पसंद नही करेंगे लेकिन फिर भी रामानंद सागर ने हार नही माना और उन्हीने जी जान लगाकर इसके सभी एपिसोड तैयार किये जिसे आज दुनिया याद करती है।
इसकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस शो के केवल 52 एपिसोड थे जिन्हें तीन बार बढ़ाकर 78 एपिसोड तक किया गया। इसकी शूटिंग 550 दिनों तक चली थी।
इतनी थी एक एपिसोड की कमाई
शो के दर्शकों की संख्या बहुत ज्यादा था। इसकी व्यूअरशिप 82% थी जो कि किसी भी टेलिविजन सीरीज की सबसे ज्यादा है। बताया जाता है कि इसके हर एपिसोड से दूरदर्शन को 40 लाख रुपये की कमाई होती थी। लेकिन साथ ही इसके एक एपिसोड को बनाने में खर्चे भी कम नही थे। दर्शकों को क्या अच्छा लगता है इस पर छोटी सी छोटी बातों को गौर करके एपिसोड तैयार किया जाता था जिसमे लगभग एक एपिसोड का 9 लाख रुपये तक का खर्च आता था।


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