हम सभी को पता है कि ध्रूमपान सेहत के लिए हानिकारक होता है, लकिन फिर भी लोगों ने इसे अपनी आदत बना रखी है। हम यह भी कह सकते हैं कि आज के हाईटेक युग में स्मोकिंग फैशन ट्रेंड भी बन गया है, तभी तो लड़कों से ज्यादा आजकल इसकी आदत लड़कियों में ज्यादा देखने को मिल रही है। अगर हम स्मोकिंग और हैल्थ की बात करें तो स्मोकिंग करने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इस बारे में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के फिजिश्यन डॉ डी हिमांशू का कहना है कि "स्कमोकिंग का शौक आजकल युवाओं में ज्यादा देखा जा रहा है। ज्यादा सिगरेट पीने वालों के फेफड़े भी खराब हो जाते हैं। इसलिए जो लोग ज्यादा स्मोकिंग करते हैं या हाल ही में जिन्होंने ध्रूमपान करना छोड़ दिया है उन्हें कुछ मेडिकल टेस्ट जरूर कराने चाहिए ताकि पता चल सकते कि उन्हें कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है।" स्मोकिंग करने वालों को कौन से मेडिकल टेस्ट कराने चाहिए जानिए इस आर्टिकल।
स्मोकिंग के खतरे
स्मोकिंग सेहत के लिए बहुत हानिकराक है और आपने शायद देखा होगा कि तंबाकू और सिगरेट के पैकेट पर भी चेतावनी लिखी होती है, बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। ज्यादा स्मोकिंग करने से आपके फेफड़े खराब हो सकते हैं और यह जानलेवा भी हो सकता है। इसके अलावा स्मोकिंग सांस लेने संबंधी समस्या, फेफड़ों का कैंसर, डायबिटीज, एजिंग प्रोसेस तेज होना, फर्टिलिटी कम होना और डिमेंशिया जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति खुद की सेहत का ध्यान रखना चाहता है तो उसके लिए बेहतर होगा स्मोकिंग से तौबा करना। लेकिन सच तो यह है कि स्मोकिंग की लत एक बार लग जाने पर आसानी से छूटती नहीं है, ऐसे में कुछ स्मोकर्स को कुछ मेडिकल टेस्ट जरूर कराने चाहिए ताकि बीमारी होने पर पहले ही उसका पता चल जाए और समय रहते इलाज किया जा सके।


स्मोकर्स के लिए मेडिकल टेस्ट
सभी स्मोकर्स को ये 6 मेडिकल टेस्ट जरूर कराने चाहिए, ताकि किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या के बारे में पहले ही पता लगाकर उसका इलाज किया जा सके।
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स्पिरोमेट्री (Spirometry)
यदि आप भी स्मोकिंग करते हैं या हाल ही में धूम्रपान छोड़ा है तो आपको स्पिरोमेट्री टेस्ट करवाना चाहिए। यह साधारण ब्रिदिंग टेस्ट है और बहुत महंगा भी नहीं है। यह टेस्ट लैब में या डॉक्टर के क्लिनिक में किया जाता। यह टेस्ट आपके लंग फंक्शन (फेफड़ों की कार्यप्रणाली) की जांच के लिए किया जाता है। चूकि स्मोकिंग से आपके फेफड़े बहुत अधिक प्रभावित होते हैं, इसलिए सभी स्मोकर्स को ये मेडिकल टेस्ट जरूर कराना चाहिए। दरअसल, यह टेस्ट फेफड़ों की कार्यप्रणाली की जांच के लिए किया जाता है। इसमें इन तीन चीजों को मापा जाता हैः
  • आप कितनी हवा अंदर लेते हैं (सांस लेते समय)
  • आप कितनी हवा बाहर निकालते हैं (सांस छोड़ते समया)
  • आप फेफड़ों से कितनी जल्दी हवा बाहर निकालते हैं
स्पिरोमेट्री टेस्ट से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का निदान किया जाता है। इस टेस्ट के परिणाम के आधार पर डॉक्टर इस बात का पता लगाता है कि आखिर किस कारण से आपको सांस लेने में परेशानी हो रही है। इन कारणों में शामिल हो सकते हैः
  • अस्थमा
  • क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज (COPD)
  • सिस्टिक फायब्रोसिस
  • लंग्स में स्कार (पलमोनरी फायब्रोसिस)
इस बात का ध्यान रखें कि इस टेस्ट से पहले बहुत अधिक भोजन करके न जाए। कंफर्टेबल कपड़े पहनें और डॉक्टर से पूछ लें कि आप जो दवाएं (यदि कोई ले रहे हैं) खा रहे हैं क्या टेस्ट के दिन उसे खा सकते हैं या नहीं। बस 15 मिनट में आसानी से यह टेस्ट हो जाता है।
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG or EKG)
यह टेस्ट हार्ट डिजीज का पता लगाने के लिए किया जाता है। स्मोकर्स के लिए मेडिकल टेस्ट की लिस्ट में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम भी शामिल है। आमतौर पर डॉक्टर मरीज के सालाना शारीरिक परिक्षण में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट भी करता है। सिगरेट के रूप में सबसे ज्यादा तंबाकू का सेवन किया जाता है। इसमें मौजूद निकोटिन न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। ज्यादा स्मोकिंग से रक्त गाढ़ा हो जाता है जिससे हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हृदय संबंधी असमान्यताओं की जांच के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट किया जाता है। इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम दिल की धड़कन की गति और नियमितता की जांच करता है और यह पता लगाता है कि हृदय में कहां क्षति हुई है। स्मोकिंग से हृदय को गंभीर क्षति पहुंचती है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है।
तंबाकू के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड होता है जो आपके लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर हृदय में ऑक्सीजन सप्लाई को बाधित करता है। साथ ही धूम्रपान से हृदय की रक्त वाहिकाएं संकीर्ण और सख्त बन जाती हैं जिससे रक्त प्रवाह कम या अवरुद्ध हो जाता है।
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चेस्ट एक्स-रे
स्मोकर्स के लिए मेडिकल टेस्ट में छाती का एक्स-रे भी शामिल है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है तंबाकू का अधिक सेवन करने वालों को हर साल चेस्ट एक्स-रे करवाना चाहिए। एक्स-रे में फेफड़े और दिल की फोटो जैसी इमेज निकालने के लिए रेडिएशन डोज का इस्तेमाल किया जाता है। सभी स्मोकर्स को छाती का एक्स-रे करवाना चाहिए, क्योंकि स्मोकिंग के कारण हृदय और रक्त वाहिका में समस्या हो सकती है जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए एक्स-रे जरूरी है, ताकि समय रहते ब्लॉक्ड आर्टरीज और दिल की स्थिति का सही-सही पता लगाया जा सके, इस डॉक्टर को निर्णय लेने में आसानी होती है कि पेशेंट को हार्ट सर्जरी की जरूरत है या नहीं। साथ ही इससे कैंसर संबंधी असमान्यताओं को भी पता लगाया जा सकता है। हालांकि यह लंग कैंसर का शुरुआती चरण में पता नहीं लगा पाता है, इसके लिए सीटी स्कैन की जरूरत होती है।
सीटी स्कैन
स्मोकर्स के लिए मेडिकल टेस्ट में सीटी स्कैन भी शामिल है। हर धूम्रपान करने वाले को सीटी स्कैन करवाना चाहिए। यह एक कंप्यूटर बेस्ड एक्स-रे है, जो बेहतर डायग्नोस्टिक इमेज प्रदान करता है और इसकी बदौलत डॉक्टरों को लंग कैंसर जैसी बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता लगाने में आसानी होती है। लंग कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाने पर इससे मरीज की जान बचाई जा सकात है, क्योंकि अर्ली स्टेज में सर्जरी आसानी से की जा सकती है। ज्यादा स्मोकिंग करने वालों को लंग कैंसर का खतरा अधिक होता है ऐसे में अर्ली डिटेक्शन से ऐसे लोगों की जान बचाई जा सकती है। लंग कैंसर के स्टेज 1 में सर्जरी होने पर मरीज के सर्वाइल की संभावना 60 से 70 प्रतिशत तक होती है। लंग कैंसर से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कभी स्मोकिंग न करना और यदि कर रहे हैं तो उसे छोड़ दें। जो लोग ज्यादा स्मोकिंग करते हैं उनके लिए सीटी स्कैन बहुत जरूरी है।
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विटामिन डी ब्लड टेस्ट
स्मोकर्स के लिए जरूरी मेडिकल टेस्ट में विटामिन डी ब्लड टेस्ट भी शामिल है। यदि आप स्मोकिंग करते हैं या पहले करते थे और आपकी उम्र 50 साल से अधिक है तो विटामिन डी का लेवल मापने के लिए सिंपल ब्लड टेस्ट करवाएं, यह आपके सालाना हेल्थ चेकअप का हिस्सा हो सकता है।
धूम्रपान करने वाले लगभग 95 फीसदी लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, खासतौर पर सर्दियों के मौसम में। विटामिन डी की कमी का मतलब है प्रति मिलिलीटर रक्त में 20 नैनोग्राम से कम विटामिन डी। विटामिन डी की कमी से कई तरह की लंग्स प्रॉब्लम होती है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है सुबह की धूप, लेकिन अधिक उम्र वालों को विटामिन डी सप्लीमेंट्स की जरूरत हो सकती है।
डायबिटीज स्क्रीनिंग
अधिक धूम्रपान करने वालों को डायबिटीज का खतरा अधिक रहता है। अध्ययन के मुताबिक, स्मोकिंग करने से शरीर में निकोटिन की अधिक मात्रा जाती है जिससे इंसुलिन का लेवल बिगड़ जाता है यानी डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आपको अधिक इंसुलिन की जरूरत होती है। टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित जो व्यक्ति स्मोकिंग करते हैं, उनके शरीर में स्मोकिंग न करने वालों की तुलना में इंसुलिन का असर कम हो जाता है। इसलिए स्मोकर्स को डायबिटीज स्क्रीनिंग जरूर कराना चाहिए। यह स्मोकर्स के लिए जरूरी मेडिकल टेस्ट है।
एक स्टडी के मुताबिक, एक दिन में एक पैकेट से कम सिगरेट पीने वालों को धूम्रपान न करने वालों की तुलना में डायबिटीज का खतरा 44% अधिक रहता है। कई अध्ययनों से यह बात साबित हो चुकी है कि स्मोकिंग करने वालों को डायबिटीज का खतरा अधिक होता है। इसलिए स्मोकर्स को डायबिटीज स्क्रिनिंग जरूर करानी चाहिए।
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क

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