वॉशिंगटन: कोरोना संकट काल में अमेरिका में गृह युद्ध जैसे हालात हो गए हैं. एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद भड़की हिंसा की आंच व्हाइट हाउस तक पहुंच चुकी है. रविवार को पत्थरबाजी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुरक्षित बंकर में ले जाया गया है. वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी समेत अमेरिका के 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है.

अमेरिका में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत और पुलिस के हाथों अन्य अश्वेत लोगों की हत्या के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की आंच शनिवार को न्यूयॉर्क से लेकर टुल्सा और लॉस एंजिलिस तक फैल गई।
वॉशिंगटन: कोरोना संकट काल में अमेरिका में गृह युद्ध जैसे हालात हो गए हैं. एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद भड़की हिंसा की आंच व्हाइट हाउस तक पहुंच चुकी है. रविवार को पत्थरबाजी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुरक्षित बंकर में ले जाया गया है. वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी समेत अमेरिका के 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है.

अमेरिका में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत और पुलिस के हाथों अन्य अश्वेत लोगों की हत्या के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की आंच शनिवार को न्यूयॉर्क से लेकर टुल्सा और लॉस एंजिलिस तक फैल गई।


कई शहरों में हिंसा और लूटपाट पर काबू पाने के लिए पुलिस ने रबर और आंसू गैस के गोले दागे। अमेरिका के 17 शहरों से लगभग 1400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इंडियानापोलिस में लगातार दूसरे दिन हुए प्रदर्शन के दौरान फायरिंग में एक व्यक्ति मौत हो गई। अमेरिका में उग्र प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने के लिए रविवार को लंदन और बर्लिन में रैलियां आयोजित की गईं।
दरअसल, अमेरिका के मिनेपॉलिस में एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. पुलिस ने जब इस अश्वेत व्यक्ति को पकड़ा था तब उसका वीडियो वायरल हो गया और उसकी मौत के बाद मिनेपॉलिस हिंसा भड़क गई जो कि अमेरिका के कई राज्यों में फैल गई.


क्या है पूरा मामला?
मिनेपॉलिस में 26 मई को जॉर्ज फ्लॉयड नाम के शख्स को पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था. एक पुलिस अफसर ने सड़क पर अपने घुटने से फ्लॉयड की गर्दन को करीब आठ मिनट तक दबाए रखा. धीरे-धीरे फ्लॉयड की हरकत बंद हो जाती है. इस घटना वीडियो वायरल हो गया. वीडियो में 40 साल का जॉर्ज लगातार पुलिस अफसर से घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा. इस दौरान आस-पास काफी भीड़ जमा होती है. उसे अस्पताल ले जाया जाता है, जहां उसकी मौत हो जाती है.
अमेरिका के मिनीपोलिस में उस श्वेत पुलिस अधिकारी को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया है. उसपर थर्ड डिग्री हत्या और मानव वध का आरोप लगाया गया. फ्लॉयड की मौत के बाद पूरे अमेरिका में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए.

तीन शब्दों ने लगाई अमेरिका में आग!
दरअसल ये पूरा विवाद अब रंगभेद से जुड़कर देखा जाने लगा है. जिसकी शुरुआत एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत हुई थी जिसका वीडियो भी वायरल हो गया था. जॉर्ज फ्लॉयड नाम के व्यक्ति को पुलिस धोखाधोड़ी के आरोप में पकड़ने गई थी. जॉर्ज को देखते ही पुलिस ने उसे हथकड़ी लगाकर पकड़ने की कोशिश की. जॉर्ज ने इसका विरोध किया. विरोध के जवाब में डेरेक चॉविन नाम के एक पुलिस अधिकारी ने जॉर्ज के साथ ज़बरदस्ती की और उन्हें ज़मीन पर पटक दिया. सड़क पर खड़ी एक कार के पिछले पहिये के पास ज़मीन पर जॉर्ज पड़े थे. और उनके ऊपर चढ़े डेरेक चॉविन ने अपने बायें पैर से जॉर्ज का गला दबाया हुआ था और वो भी पूरे सात मिनट तक.

इस दौरान जॉर्ज रोतो रहे. छटपटाते रहे और बोलते रहे कि उन्हें सांस नहीं आ रही है. मुझे छोड़ दो (I CANT BREATHE).
इस पूरे वाकये को एक महिला ने कैमरे में कैद कर लिया. पुलिसकर्मी के लगातार गर्दन दबाए रखने की वजह से जॉर्ज की मौत हो गई और तभी से अमेरिका में शुरू हो गया.

अमेरिका में ये पहला वाकया नहीं जब रंगभेद की वजह से ऐसा आंदोलन देखने को मिला हो. 2014 में भी ठीक इसी तरह का एक कत्ल पुलिस की हिरासत में हुआ था, तब भी मारे गए व्यक्ति के आखिरी तीन शब्द ‘I CANT BREATHE’ ही थे और अब ऐसा लग रहा है मानो अमेरिका में पुराना इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है.

अमेरिका में हालात बेहद तनावपूर्ण
अब अमेरिका में हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं. मिनिपोलिस से शुरू हुआ आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है. लोगों ने उन पुलिस थानों को आग लगा दी, जहां पर आरोपी पुलिसकर्मी काम करते थे. आरोपी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है, लेकिन अश्वेत समुदाय के लोग आरोपियों पर हत्या का मुकदमा चलाने की मांग रहे हैं. लोग चार दिन से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन इसमें दंगाइयों को भी मौका मिल गया, वो जगह जगह आग लगा रहे हैं। सिर्फ यही नहीं वो आतिशबाज़ी और डांस करके जश्न भी मना रहे हैं.

कई जगहों पर सुपरमार्केट्स में लूटपाट
इन दंगों के बीच मिनिपोलिस शहर में कई जगहों पर सुपरमार्केट्स में लूटपाट भी हुई. दंगाइयों ने दुकानों में तोड़फोड़ करके वहां पर रखा सामान लूट लिया. अश्वेत समुदाय के लोगों ने पुलिस पर भी हमले किए. उनकी गाड़ियों को तोड़ दिया. हालत ये है कि मिनिपोलिस शहर में अमेरिका को नेशनल गार्ड लगाना पड़ा है. ये अमेरिका की सेना का अतिरिक्त सैन्यबल है, जिसे वहां पर घरेलू आपातकाल की स्थितियों में उतारा जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भी कह दिया है कि लूटमार करने पर गोली मार दी जाएगी.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका धुर वामपंथी संगठन अंतिफा की इन हिंसक प्रदर्शनों में भूमिका को देखते हुए उसे आतंकी संगठन घोषित करने पर विचार कर रहा है। फ्लॉयड की मौत के बाद देशभर में अचानक भड़के हिंसक प्रदर्शनों के लिए ट्रंप प्रशासन इसी अतिवादी संगठन को जिम्मेदार मान रहा है। अटॉर्नी जनरल विलियम पी बर्र ने भी एक बयान में कहा कि हिंसक घटनाएं अंतिफा और अन्य समान समूहों द्वारा भड़काई जा रही हैं और उनके साथ इसी के अनुरूप व्यवहार होगा।

न्‍यूयॉर्क में कई वाहन फूंके
न्यूयॉर्क शहर में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के कई वाहनों में आग लगा दी। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है। अटलांटा, लॉस एंजिलिस, फिलाडेल्फिया, डेनवर, सिनसिनाटी, पोर्टलैंड, ओरेगन, लुइसविले, केंटकी सहित कई प्रमुख शहरों में कफ्र्यू के बावजूद रात भर हिंसक घटनाएं होती रहीं।
प्रदर्शनकारियों पर तीर-धनुष से हमला
साल्ट लेक सिटी में एक व्यक्ति ने प्रदर्शनकारियों पर तीर-धनुष से निशाना बनाया। इसके जवाब में भीड़ द्वारा उस पर हमला किया गया। लॉस एंजिलिस की गलियों में आगजनी की घटनाएं हुई। प्रदर्शनकारियों ने उत्तरी कैरोलिना में अमेरिकी झंडे को तोड़ दिया।
फायरिंग में एक की मौत
इंडियानापोलिस में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शनकारियों द्वारा इमारतों को क्षतिग्रस्त करने और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आग के हवाले करने का सिलसिला जारी रहा। यहां पर प्रदर्शन के दौरान हुई फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत के बाद पुलिस अब इन घटनाओं की जांच कर रही है।
प्रदर्शनकारियों के साथ झड़पें
सोशल मीडिया पर पोस्ट वीडियो में प्रदर्शनकारी मैनहट्टन, टाइम स्क्वायर के फिफ्थ एवेन्यू स्थित ट्रंप टॉवर, कोलंबस सर्किल पर एकत्र होकर फ्लॉयड की मौत का विरोध करते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में न्यूयॉर्क शहर में अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते और उन्हें खदेड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। जबकि एक अन्य वीडियो में न्यूयॉर्क पुलिस विभाग की दो कारें प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ती दिखाई दी जो एक अवरोधक को हटा रहे थे और उस पर सामान फेंक रहे थे। यूनियन स्क्वायर के नजदीक एक बड़े वाहन को भी आग के हवाले करने की घटना सामने आई है।
हिंसा के लिए भड़काया
न्यूयॉर्क के मेयर बिल डी ब्लासियो ने ब्रूकलिन में हुए प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि कुछ लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आए थे, लेकिन दूसरे कुछ लोगों ने उन्हें हिंसा के लिए भड़काया। उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शन से संबंधित कुछ वीडियो देखे हैं। यह शहर की विचारधारा और मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। न्यूयॉर्क प्रांत के गवर्नर एंड्रयू कुओमो ने कहा, ‘अमेरिका का इतिहास नस्लवाद और भेदभाव से भरा पड़ा है। यही सच्चाई है। इस आक्रोश और हताशा के पीछे यह बड़ी वजह है। मैं प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा हूं, लेकिन हिंसा किसी भी मसले का हल नहीं है।’
प्रदर्शनकारियों के निशाने पर मीडिया के लोग
पूरे अमेरिका में हो रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा पर उतारू भीड़ के निशाने पर प्रमुख रूप से मीडिया के लोग हैं। शनिवार को व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शनकारियों ने फॉक्स न्यूज के एक रिपोर्टर लेलैंड विटरेट को पीट दिया। हमले से परेशान विटरेट ने कहा कि उन्हें उनके मीडिया आर्गेनाइजेशन की वजह से निशाना बनाया गया। शनिवार को ही कोलंबिया में टीवी रिपोर्टर पर ईट से हमला किया गया था। जबकि मिनीपोलिस में तो एक पत्रकार की जांघ में रबर की बुलेट आकर लगी थी। पीट्सबर्ग में एक टीवी कैमरामैन प्रदर्शनकारियों द्वारा पीटे जाने की बात कही है।
प्रदर्शनकारियों की भीड़ में पिकअप ट्रक घुसा
फ्लोरिडा के टाल्हासी में शनिवार को प्रदर्शनकारियों की भीड़ में एक पिकअप ट्रक घुस गया जिससे लोगों में भगदड़ मच गई। हालांकि एक बड़ा हादसा टल गया। वीडियो में नजर आ रहा है कि ट्रक यातायात बत्ती पर रुका तो प्रदर्शनकारी उसके आसपास जमा हो गए, कुछ लोग वाहन चालक से बात करने लगे। इसके बाद एक अन्य वीडियो में दिखा कि ट्रक की खिड़की पर एक बोतल मारी गई और ट्रक की गति अचानक से बढ़ गई और हड़बड़ाए लोग एक ओर हो गए। इस घटना में कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है।
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