भारत में कई ऐसे क्रिकेटर हुए हैं, जिन्होंने घरेलू स्तर पर अविश्वसनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन उनको भारतीय टीम में कभी नहीं चुना गया। ऐसे ही एक खिलाड़ी थे राजिंदर गोयल, जिनका रविवार को निधन हो गया। भारतीय प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपने जमाने के दिग्गज स्पिनरों में शामिल राजिंदर गोयल का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण रविवार 21 जून को निधन हो गया। राजिंदर गोयल 77 वर्ष के थे और वे काफी समय से बीमार चल रहे थे।
राजिंदर गोयल के परिवार में पत्नी और बेटे नितिन गोयल हैं जो स्वयं प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे हैं और घरेलू मैचों के मैच रेफरी हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भी दिग्गज स्पिनर को ट्विटर पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
उधर, बोर्ड के मुखिया सौरव गांगुली ने कहा है कि भारतीय क्रिकेट समुदाय ने एक महान घरेलू क्रिकेटर को खो दिया है। भारतीय कप्तान विराट कोहली, शिखर धवन और वीवीएस लक्ष्मण जैसे तमाम खिलाड़ियों ने उनको याद किया है।

बाएं हाथ के स्पिनररा जिंदर गोयल उस दौर में खेला करते थे जब बिशन सिंह बेदी भारतीय टीम का अहम हिस्सा हुआ करते थे। इसी वजह से उन्हें कभी भारतीय टीम में जगह नहीं मिली। राजिंदर गोयल ने हरियाणा और उत्तर क्षेत्र की तरफ से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 157 मैचों में 750 विकेट लिए। वहीं, रणजी ट्रॉफी में उनके नाम सबसे ज्यादा 637 विकेट हैं। वह 44 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते रहे। सुनील गावस्कर ने अपनी किताब आइडल्स में जिन खिलाड़ियों को जगह दी थी उसमें गोयल भी शामिल थे।
कभी भारत के लिए नहीं खेल पाए राजिंदर
हैरान करने वाली बात ये है कि घरेलू क्रिकेट में बाएं हाथ के इस स्पिनर का करियर काफी लंबा रहा, लेकिन कभी भारतीय टीम में चुने तक नहीं गए। यह नेहरू युग में शुरू हुआ और राजीव गांधी के समय तक चला। हालांकि, वह टीम इंडिया के लिए नहीं खेल पाए। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 750 तक विकेट लिए। इसमें गावस्कर का विकेट भी शामिल था। बांबे के पदमाकर शिवालकर की तरह वह भी अनलकी रहे कि उन्होंने अपना अधिकतर क्रिकेट बिशन सिंह बेदी के दौर में खेला।

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