नई दिल्ली। लद्दाख में विवादित वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूद गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प के एक हफ्ते बाद ही जापान ने चीन की ओर रुख कर लिया है। जिस आइलैंड पर चीन लंबे समय से अपनी नजरें गड़ाए बैठा है उस ओर जापान ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। दरअसल, ओकीनावा में इशिगाकी सिटी काउंसिल ने एक बिल को मंजूरी दी जिससे सेंकाकुस द्वीप पर जापान के नियंत्रण को मजबूती प्रदान करता है।
पूर्वी चीन सागर में आइलैंड पर विवाद
उल्लेखनीय है कि जापान और चीन के बीच पूर्वी चीन सागर के द्वीपों को लेकर विवाद है। एक ओर जापान इसे सेंकाकुस कहता है, वहीं दूसरी ओर चीन इस पर दावा करता है और इसे दियाओयुस कहता है।
चीन ने दी थी चेतावनी
सिटी काउंसिल द्वारा बिल पारित करने से पहले बीजिंग ने टोक्यो को आइलैंड चेन में किसी तरह के बदलाव के बाबत चेतावनी दे दी थी। चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि यह आइलैंड उनका अंर्तनिहित इलाके के अंतर्गत आता है। बीजिंग ने जापान से दियाओयू आइलैंड पर किसी तरह के बदलाव या नए परिवर्तन से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पूर्वी चीन सागर में स्थिरता कायम करने के लिए व्यवहारिक कार्यवाही करे। इसके अलावा बीजिंग ने जापान से 'चार-सिद्धांत सहमति' की भावना का पालन करने को भी कहा। वहीं जापान के सिटी काउंसिल ने कहा कि यह विधेयक प्रशासनिक प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार करने के लिए आवश्यक है।
बता दें कि अप्रैल के बाद से चीनी जहाजों को जापानी तट रक्षक द्वारा सेनकाकुस के करीब पानी में देखा गया था। चीनी जहाजों की संख्या पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ी है, जिनमें से चार जहाज तो उस दिन भी देखे गए थे, जब क्षेत्र में नगर परिषद द्वारा बिल पारित किया गया था। जापान के कैबिनेट सचिव ने पिछले हफ्ते दोहराया कि सेनकाकुस टोक्यो के नियंत्रण में है और यह क्षेत्र निर्विवाद रूप से ऐतिहासिक और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत जापान का है।
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