रिपोर्ट- सोमनाथ सोनकर
बस्तीः जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन की ताबड़तोड़ कार्यवाहियों से सरकारी महकमों में हड़कम्प मची है। कब और कौन अफसर या कर्मचारी डीएम के निशाने पर होगा कुछ कहा नही जा सकता। खबर है भ्रष्टाचार मामले में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर काम कर रहे जिलाधिकारी इस मामले की किसी की नही सुन रहे हैं।
इससे बेइमान और कामचोर अफसरों, कर्मचारियों में जहां अफरा तफरी मची है वहीं जनता में डीएम के प्रति सम्मान बढ़ता जा रहा है। ताजा मामले में जिलाधिकारी ने शौचालय निर्माण के मामले में शिथिलता पाये जाने पर 270 ग्राम प्रधानों को शो काज़ नोटिस जारी किया है। दो ग्राम प्रधानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गयी है। तीन ग्राम प्रधानों का पॉवर छीन लिया गया है। इतना ही नही 42 ग्राम पंचायत सचिवों को आरोप पत्र दिये गये हैं, 3 को निलंबित किया गया है, 12 की वेतन वृद्धि स्थायी रूप से बाधित की गयी है।
14 एडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि मिली और तीन की वेतन वृद्धि स्थायी रूप से रोक दी गयी। इन ताबड़तोड़ कार्यवाहियों से जिलाधिकारी जनता में गहरी पैठ बना चुके हैं। जनता का कहना है कि 20 सालों में ऐसा संवेदनशील जिलाधिकारी नही आया, जिससे मिलने, अपनी बात कहने के निये किसी संपर्क की जरूरत हो या फिर सामने जाने में डर लगता हो। जनता के बीच से ये भय निकल जाये, कलेक्टर छोटी बड़ी हर बात सुनकर एक्शन लेने लगे तो समझिये रामराज शुरू हो गया। बताते चलें शौचालय निर्माण के मामले में बस्ती का प्रदेश में 27 वां स्थान है।


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