अमित श्रीवास्तव
 हिन्द न्यूज़ टाइम्स 
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में मौत की सकाा पाए चार में से तीन दोषियों की याचिका को गुरुवार देर रात को खारिज कर दिया। इस याचिका में तीन दोषियों ने निचली अदालत द्वारा उनकी फांसी पर रोक नहीं लगाने के फैसले को चुनौती दी थी। निर्भया के गुनाहगारों को शुक्रवार सुबह फांसी दी जानी है।
क्यो बोले न्यायमूर्ति
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह और न्यायमूति संजीव नरूला की पीठ ने देर रात की सुनवाई में दोषियों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई मेरिट नहीं है।
निचली अदालत ने गुरुवार दोपहर में अक्षय कुमार सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा की मृत्यु वारंट पर रोक की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले देर रात सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा था कि मामले के चौथे दोषी की ओर से दया याचिका दायर करने में देरी दिखाती है कि कोई साजिश है और कोई व्यवस्था से खेल रहा है।
दया याचिका में हुई देरी
पीठ ने कहा कि दया याचिका दायर करने में काफी देरी हुई और दोषियों की ओर से पेश हुए वकील से मजबूत कानूनी बिंदु पेश करने का आग्रह किया। वकील ने उच्च न्यायालय (सेआग्रह किया कि वह फांसी को तीन-चार दिन के लिए टाल दें ताकि वह अपने मामले से अवगत करा सकें। बहरहाल, पीठ ने कहा कि यह चौथा मृत्यु वारंट है और दोषियों की तरफ से पहले ही काफी देरी की जा चुकी है। पीठ ने कहा कि आपको रोक के लिए वाजिब दलीलें देनी होंगी। अगर आप वाजिब दलीलें नहीं देंगे तो हम रोक नहीं लगा सकते हैं। आपका ढीला-ढाला रवैया है।
याचिका में नहीं कोई आधार
उन्होंने कहा कि रात को 11 बजे हम आपसे कह रहे हैं कि कृपया पॉइंट (Point) पर आइए। आप पॉइंट पर नहीं आ रहे हैं। पीठ ने आगे कहा कि याचिका में कोई आधार नहीं है और वकील से मजबूत कानूनी बिंदु रखने को कहा। पीठ ने दोषियों के वकील से कहा कि वक्त जाया नहीं करें, क्योंकि सुबह साढ़े पांच बजे याचिका निरर्थक हो जाएगी। पीठ ने कहा, हम उस समय के बहुत निकट हैं जब आपके मुवक्किल ईश्वर से मिलेंगे। इसलिए वक्त बरबाद नहीं करें।' उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि अक्षय कुमार सिंह की पत्नी की तलाक की लंबित अर्जी उसके मुत्युदंड पर रोक लगाने के लिए प्रासंगिक नहीं है। पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही व्यवस्था दे चुका है कि तलाक की अर्जी प्रासंगिक नहीं है।

न्यायालय का फैसला अंतिम
पीठ ने यह भी कहा कि चारों दोषियों को मौत की सजा की पुष्टि पर उच्चतम न्यायालय का फैसला अंतिम है और हम उसकी समीक्षा नहीं कर सकते। पीठ ने कहा, हम यह नहीं कह सकते हैं कि मृत्यु वारंट (Death Warrent) को लागू नहीं किया जाए, क्योंकि अक्षय की पत्नी की तलाक की अर्जी लंबित है।' मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को शुक्रवार की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दी जानी है। दोषियों के वकील ए पी सिंह ने अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा कि व्यवस्था उनके खिलाफ है।

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