प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ 5वीं बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए उनसे कोरोना लॉकडाउन से बाहर निकलने पर चर्चा की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई चीजों पर उनके साथ विचार विमर्श कर मुख्यमंत्रियों से राय जानी। इसके अलावा मजदूरों के पलायन और उनके जाने से आर्थिक गतिविधियों की बहाली में आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा की।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सभी राज्य मिलकर काम कर रहे हैं। कैबिनेट सचिव, राज्यों के सचिव से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, कोविड-19 महामारी से निपटने में भारत की सफलता वैश्विक स्तर पर दिख रही है और भारत सरकार इस संबंध में सभी राज्य सरकारों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करती है।
जैसे-जैसे हम एक साथ आगे बढ़ रहे हैं, हम वैसे ही बने रहेंगे।
मुख्यमंत्रियों से संवाद में पीएम मोदी ने कहा कि धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से, देश के कई हिस्सों में आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया आगे के निर्णयों को निश्चित करेगी। हमें महसूस करना चाहिए कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई पर अब और अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने शुरू से इस बात पर जोर दिया कि जो जहां हैं वहीं रहें। लेकिन घर जाना मानव का स्वभाव होता है, इसलिए हमने अपना निर्णय बदला। इसके बावजूद, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बीमारी गांवों में नहीं फैले। यही हमारे लिए बड़ी चुनौती है। इस दौरान बैठक में मौजूद गृह मंत्री अमित शाह ने आरोग्य सेतु मोबाइल एप के महत्व पर प्रकाश डाला और मुख्यमंत्रियों से इसके डाउनलोड को लोकप्रिय बनाने के लिए आग्रह किया, क्योंकि इससे वायरस के प्रसार पर नज़र रखने में मदद मिलेगी।
वही, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अंतरराज्यीय सप्लाई चेन को सही तरीके से काम करने देना चाहिए। बिना राशन कार्ड के भी लोगों को राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में इकॉनोमिक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। जो प्रवासी मजदूर फंसे हुए है और वापस नहीं जा रहे हैं उन्हें कुछ निश्चित गतिविधियों में लगाया जाना चाहिए।
बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन को कंटेनमेंट जोन तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। सुरक्षात्मक उपायों के साथ आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने के साथ ही और गर्मी छुट्टी के बाद स्कूल- कॉलेजों को खोलने और सार्वजनिक परिवहन को धीरे से शुरू करना चाहिए।
इस दौरान तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव इस बात पर आशंका जाहिर की है कि ट्रेन सेवा की शुरुआत होने पर कोरोना संक्रमण फैल सकता है और स्क्रीनिंग करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा, "हम पूरी तरह से स्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। ट्रेन सेवा की इजाजत नही दी जानी चाहिए। हम चाहते हैं कि केन्द्र पर्याप्त रणनीति तैयार करें और ट्रेन सेवा को रोका जाना चाहिए।" वही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में तमिलनाडु ने एनएचएम फंड जल्द से जल्द जारी करने की मांग करते हुए राज्य के लिए 2000 करोड़ रुपये की विशेष मदद और लंबित पड़ी जीएसटी की राशि जारी करने के लिए कहा।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान कहा कि राज्य में करी 30 हजार लोगों को अतिसंवेदनशील मानकर उनकी जांच की गई। हमें हालात सामान्य करने की और उस कलंक के धब्बे को खत्म करने की जरूरत है। कोरोना पॉजिटिव परिवार सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं। हमने लोगों से यह अपील की है कि वे सेल्फ आइसोलेशन के लिए आगे आएं। हमें लोगो को वैक्सीन के तैयार होने तक इस कोरोना वायरस के साथ जीने के लिए तैयार करना होगा। हमें वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए व्यापक तौर पर जागरूक करना होगा।
वही, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के दौरान कहा, एक राज्य के तौर पर हमले कोरोना संक्रमण से लड़ने में अपना बेहतर कर रहे हैं। केन्द्र को इस मुश्किल घड़ी में राजनीति नहीं करनी चाहिए। हम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और अन्य बड़े राज्यों घिरे हुए हैं और इसका सामना करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को बराबर का महत्व मिलना चाहिए और हमें टीम इंडिया की तरह काम करना चाहिए।
आपको बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंंत्री नरेन्द्र मोदी की बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रही। वही, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू समेत कई मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल हुए।
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