कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक रेगिस्तानी टिड्डियों और गुलाबी व्यस्क टिड्डों के कारण 11 मई तक राजस्थान और पंजाब के 14,299 हेक्टेयर में उगे फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं जनवरी महीने में गुजरात में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था। यहां पिछले 25 सालों में पहली बार हुआ, जब टिड्डियों के झुंड के कारण लगभग 25,000 हेक्टेयर में उगे गेहूं, जीरा और आलू की कम से कम 75 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई थीं।
भारतीय अधिकारी फसलों को तबाह करने वाले इन रेगिस्तानी टिड्डों के झुंडों से लड़ने के लिए किसानों की मदद करने में जुट गए हैं। ये फसलों को टिड्डों (locusts) से बचाने के लिए कीटनाशक अभियान चलाने में किसानों की मदद कर रहे हैं।
राजस्थान में नियंत्रण अभियान के बाद टिड्डी दलों ने उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे करौली जिले और अन्य क्षेत्र का रुख कर लिया है। मध्य प्रदेश में कई जगह टिड्डी दलों के हमले के बाद उनके महाराष्ट्र के नागपुर और वर्धा जिलों तक पहुंच जाने की सूचना है। इसके चलते उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश, राजस्थान से लगे 10 जिलों में हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया है। यूपी के अधिकारियों ने बताया कि दोनों राज्यों की सीमाओं से लगे जिलों में रात के समय रसायनों का भारी छिड़काव करने के आदेश दिए गए हैं।
UP के उपनिदेशक कृषि कमल कटियार के मुताबिक, राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमाओं से लगे जिलों में स्प्रेयर युक्त ट्रैक्टरों, पॉवर स्प्रेयरों और फायर ब्रिगेड के ट्रकों में रसायन भरकर तैयार रखने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही रात के समय भारी स्प्रे करने को कहा गया है। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को थाली बजाकर और पटाखे छोड़कर तेज आवाज करने का भी निर्देश दिया गया है।
उन्होंने बताया कि झांसी के जंगल में रविवार को टिड्डी दलों का समूह देखा गया था, जिसे राज्य और केंद्र की टीमों ने मिलकर रसायनों के छिड़काव से 40 फीसदी तक खत्म कर दिया है। हवा की दिशा के चलते इस टिडड़ी दल के महोबा जिले में प्रवेश करने की आशंका है। इसलिए महोबा के अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। झांसी में टिड्डी दल ने करीब 25 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों को नुकसान पहुंचाया है।राजस्थान के करौली में पहुंचे टिड्डी दल के लिए उन्होंने कहा कि इसके चलते सीमा से लगे झांसी, ललितपुर, जालौन और औरैया जिलों के अलावा उनसे सटे हमीरपुर, कन्नौज, इटावा और कानपुर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने कहा, रात में इन जिलों में कीटनाशकों का छिड़काव अभियान चलाया जाएगा।
जबकि मथुरा में भी टिड्डी दलों के हमले की संभावना को देखते हुए तैयारियां की गई हैं। मथुरा के जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्रा ने कहा, 200 लीटर क्लोपिरीफोस को रिजर्व में रखा गया है और क्षेत्र में इस रसायन के विक्रेताओं के जिले से बाहर सप्लाई करने पर रोक लगा दी गई है। झांसी के जिलाधिकारी आंद्रा वम्सी ने कहा, ग्रामीणों को टिड्डी दल दिखाई देते ही कंट्रोल रूम को बताए जाने के लिए कहा गया है। फायर विभाग को आपातकालीन हालात के लिए रसायनों से भरे ट्रक तैयार रखने को कहा गया है।
इस बारे में कृषि मंत्रालय का कहना है कि बारिश के बाद रेगिस्तानी टिड्डियों के झुंड आमतौर पर उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में पाए जाते हैं। क्योंकि इनका ब्रीडिंग सेंटर यहीं होता है। ये बाद में प्रजनन के लिए पाकिस्तान से होते हुए में प्रवेश में करते हैं। इसी कड़ी में 30 अप्रैल को राजस्थान और पंजाब में रेगस्तानी टिड्डों के झुंड के बारे में जानकारी मिली थी। मंत्रालय ने आगे कहा कि गुलाबी अपरिपक्व व्यस्क टिड्डों को झुंड उची उड़ान भरते हैं। इस कारण पाकिस्तान की तरफ से चलने वाली तेज हवाओं के चलते ये लंबी दूरी तय करते हैं।
प्रशासन ने किया अलर्ट
कृषि मंत्रालय के के आंकड़ों के अनुसार औरैया, इटावा, एटा, फर्रुखाबाद, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, बुलंदशहर तक टीड्डी दल का काफिला पहुंचने लगा है। इसके अलावा राजस्थान, हरियाणा के मेवात होते हुए टिड्डी दल राजधानी दिल्ली की ओर बढ़ने लगा है। टिड्डी दल के संभावित हमले को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। किसानों को अपनी फसलों को टिड्डी दल के हमले से बचाने का उपाय बताया जा रहा है तथा कृषि वैज्ञानिक सलाह दे रहे हैं।
कृषि मंत्रालय के के आंकड़ों के अनुसार औरैया, इटावा, एटा, फर्रुखाबाद, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, बुलंदशहर तक टीड्डी दल का काफिला पहुंचने लगा है। इसके अलावा राजस्थान, हरियाणा के मेवात होते हुए टिड्डी दल राजधानी दिल्ली की ओर बढ़ने लगा है। टिड्डी दल के संभावित हमले को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। किसानों को अपनी फसलों को टिड्डी दल के हमले से बचाने का उपाय बताया जा रहा है तथा कृषि वैज्ञानिक सलाह दे रहे हैं।
किसानों को बताए उपाय
- कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए किसान दो प्रकार के साधन अपना सकते है।
- किसान टोली बनाकर शोर मचाकर, ध्वनि यंत्र बजा कर, टिड्डी दल को डरा कर भगा सकते हैं।
- इसके लिए ढोलक, ट्रैक्टर, मोटर साइकल का साईलेंसर, खाली टीन के डब्बे, थाली इत्यादि से ध्वनि पैदा की जा सकती है।
- फसलों और अन्य वृक्षों को टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए किसानों को कीटनाशक मालाथियन, फेनवालरेट, क्विनालफोस, क्लोरोपायरीफोस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेनजुरान, फिप्रोनिल तथा लामडासाइहलोथ्रिन कीटनाशक का प्रयोग करने का सुझाव दिया गया है।
कितना खतरनाक होता है यह दल
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, इस समय राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में टिड्डी दलों का प्रकोप है। सबसे बुरी तरह राजस्थान प्रभावित हुआ है। मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि टिड्डी दलों का प्रकोप पूर्व की ओर बढ़ रहा है जिससे खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है। टिड्डियों की दुनिया भर में 10 हज़ार से ज़्यादा प्रजातियां बताई जाती हैं, लेकिन भारत में मुख्य तौर से चार प्रजातियां रेगिस्तानी टिड्डा, प्रव्राजक टिड्डा, बम्बई टिड्डा और पेड़ वाला टिड्डा ही सक्रिय ही रहती हैं। जब हरे-भरे घास के मैदानों पर कई सारे रेगिस्तानी टिड्डे इकट्ठे होते हैं तो झुंड में भयानक रूप ले लेते हैं। एफएओ की मानें तो रेगिस्तानी टिड्डे दुनिया की दस फीसदी आबादी की ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं इसलिए इन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक कीट कहा जाता है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, इस समय राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में टिड्डी दलों का प्रकोप है। सबसे बुरी तरह राजस्थान प्रभावित हुआ है। मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि टिड्डी दलों का प्रकोप पूर्व की ओर बढ़ रहा है जिससे खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है। टिड्डियों की दुनिया भर में 10 हज़ार से ज़्यादा प्रजातियां बताई जाती हैं, लेकिन भारत में मुख्य तौर से चार प्रजातियां रेगिस्तानी टिड्डा, प्रव्राजक टिड्डा, बम्बई टिड्डा और पेड़ वाला टिड्डा ही सक्रिय ही रहती हैं। जब हरे-भरे घास के मैदानों पर कई सारे रेगिस्तानी टिड्डे इकट्ठे होते हैं तो झुंड में भयानक रूप ले लेते हैं। एफएओ की मानें तो रेगिस्तानी टिड्डे दुनिया की दस फीसदी आबादी की ज़िंदगी को प्रभावित करते हैं इसलिए इन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक कीट कहा जाता है।


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