अमित श्रीवास्तव
संपादक
हिन्द न्यूज़ टाइम्स
जो बनारस से नहीं हैं, वह हमसे पूछा करते हैं "भइया, बनारस में ऐसा क्या है जो किसी और शहर में नहीं है?"
हम हर बार बस इतना कहते हैं "कुछ खास नहीं बस यहाँ आने के बाद ये सवाल कभी कोई नहीं पूछता।"
बनारस बेहद धीमा आलस्य भरा एहसास है। शहर नहीं है। बनारस शहर कभी नहीं था। यह बस मिजाज है कि रस बना रहे। चाहे बतकही में हो या चाय में। घाट पर शाम की चिलम हो या नाव पर हिचकोला... बस रस बना रहना चाहिये।
बनारस बस घाटों का नाम नहीं है। बनारस अपनी सबसे पुरानी सभ्यता की नींव पर खड़ा गलियों के जाल में उलझा हुआ है। ये शहर सुस्त है, इसकी नींद चाय पर खुलती है और चाय पर ही ख़तम... बीच में कचौड़ी-सब्जी का मजा। बनारसी एक ऐसी प्रजाति है जो बस यहीं मिलती है। घाट पर पेट खुजाते, चाय में अदरक कम होने पर बहस करते, मोदी-ट्रम्प, ओबामा, ओसामा सबकी चौचक लगाते। बनारसी ही वह जीव है, जो पूरा दिन इस बात पर दिमाग खराब किये रह सकता है कि उसकी लस्सी में मलाई कम था। ये शहर नहीं है। शहर आना होगा तो काशी या वाराणसी आना... जीना हो तो बनारस आना। मुर्दों से भी मजा लेने वालों का शहर... वरूणा और असि नदी का शहर, सभी का होकर भी जो किसी का नहीं वह... बाबा विश्वनाथ का शहर।
और हाँ; जब भी बनारस आना इसे देखना मत। याद रखना, बनारस देखने का नहीं, जीने का नाम है। महाश्मशान शहर; मिजाज बनारस; पता काशी... आना जरूर।
संपादक
हिन्द न्यूज़ टाइम्स
जो बनारस से नहीं हैं, वह हमसे पूछा करते हैं "भइया, बनारस में ऐसा क्या है जो किसी और शहर में नहीं है?"
हम हर बार बस इतना कहते हैं "कुछ खास नहीं बस यहाँ आने के बाद ये सवाल कभी कोई नहीं पूछता।"
बनारस बेहद धीमा आलस्य भरा एहसास है। शहर नहीं है। बनारस शहर कभी नहीं था। यह बस मिजाज है कि रस बना रहे। चाहे बतकही में हो या चाय में। घाट पर शाम की चिलम हो या नाव पर हिचकोला... बस रस बना रहना चाहिये।
बनारस बस घाटों का नाम नहीं है। बनारस अपनी सबसे पुरानी सभ्यता की नींव पर खड़ा गलियों के जाल में उलझा हुआ है। ये शहर सुस्त है, इसकी नींद चाय पर खुलती है और चाय पर ही ख़तम... बीच में कचौड़ी-सब्जी का मजा। बनारसी एक ऐसी प्रजाति है जो बस यहीं मिलती है। घाट पर पेट खुजाते, चाय में अदरक कम होने पर बहस करते, मोदी-ट्रम्प, ओबामा, ओसामा सबकी चौचक लगाते। बनारसी ही वह जीव है, जो पूरा दिन इस बात पर दिमाग खराब किये रह सकता है कि उसकी लस्सी में मलाई कम था। ये शहर नहीं है। शहर आना होगा तो काशी या वाराणसी आना... जीना हो तो बनारस आना। मुर्दों से भी मजा लेने वालों का शहर... वरूणा और असि नदी का शहर, सभी का होकर भी जो किसी का नहीं वह... बाबा विश्वनाथ का शहर।
और हाँ; जब भी बनारस आना इसे देखना मत। याद रखना, बनारस देखने का नहीं, जीने का नाम है। महाश्मशान शहर; मिजाज बनारस; पता काशी... आना जरूर।


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