महाराष्ट्र के बुलढाणा ज़िले की लोनार झील हमेशा से जियोलॉजिस्टों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है. दुनिया की सबसे प्राचीन झीलों में शुमार लोनार ने एक बार फिर से वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है. इस झील का पानी बीते 3-4 दिनों से अचानक लाल हो गया है. जब प्रशासन की इस पर नज़र गई तो अपने स्तर से उसने भी जांच शरू की, लेकिन कोई कारण अब तक पता नहीं चल पाया है.
The Lonar lake in Maharashtra's Buldhana district is a popular tourist hub and also attracts scientists from all over the world. The colour of water in Maharashtra’s Lonar lake, formed after a meteorite hit the Earth some 50,000 years ago, has changed to pink
See shivani arya's other Tweets
लोनार के तहसीलदार सैफान नदाफ ने कहा है कि बीते दो से तीन दिनों में हमने देखा है कि झील के पानी का रंग बदल गया है. वन विभाग को सैंपल इकट्ठा करने के लिए कहा गया है, ताकि कारणों का पता चल सके.


झील के पानी का रंग बदलने की चर्चा पूरे इलाक़े में है.
कारणों का पता नहीं चलने तक यह कौतूहल का विषय बना रहेगा. हालांकि शुरुआती जांच के बाद विशेषज्ञ इस बदलाव की वजह खारेपन और पानी में काई की मौजूदगी को मान रहे हैं.
Maharashtra: Water of Lonar crater lake in Buldhana district has turned red. Saifan Nadaf, Lonar tehsildar says, "In the last 2-3 days we have noticed that the colour of lake's water has changed. Forest Dept has been asked to collect a sample for analysis & find out the reason".
View image on TwitterView image on Twitter
180 people are talking about this
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब झील के पानी का रंग बदला है, लेकिन इस बार यह बदलाव बिलकुल साफ़ नज़र आ रहा है. लोनार झील संरक्षण एवं विकास समिति के सदस्य गजानन खराट ने बताया कि यह झील अधिसूचित राष्ट्रीय भौगोलिक धरोहर स्मारक है. इसका पानी खारा है, जिसका पीएच स्तर 10.5 है. सोशल मीडिया पर भी इसकी ताज़ा तस्वीरें वायरल हो रही हैं.
 ऊपर ताज़ा तस्वीर, नीचे पहले की तस्वीर


50 हज़ार साल पुरानी है झील
आपको बता दें कि लोनार झील महाराष्ट्र के बुलढाणा ज़िले में स्थित एक खारे पानी की झील है. इसका निर्माण एक उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था. स्मिथसोनियन संस्था, संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण, सागर विश्वविद्यालय और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला ने इस स्थल का अध्ययन भी किया है.
इस झील में 2007 में जैविक नाइट्रोजन यौगिकीकरण खोजा गया था. ऐसा माना जाता है कि उल्का पिंड का वजन दस लाख टन था. इस झील की उम्र 50 हज़ार साल से भी ज़्यादा मानी जाती है

Share To:

Post A Comment: